समाज के प्रति हमारा दायित्व
🌟आर सी मेहता🌟 🔸समाज के प्रति हमारा दायित्व🔸 समाज के प्रति हमारा दायित्व बिल्कुल उसी तरह है जैसा कि हमारा अपने परिवार के प्रति दायित्व होता है। हम जिस परिवार में जन्म लेते हैं जिस परिवार में रहते हैं, तो उस परिवार अर्थात उस परिवार सदस्यों के प्रति हमारा कुछ दायित्व बनता है। चाहे वो माता-पिता हो, पत्नी, भाई-बहन या पुत्र-पुत्री आदि हों। समाज भी हमारे परिवार की तरह होता है। ये एक वृहद स्तर का परिवार अर्थात बहुत बड़ा परिवार होता है। जब हम किसी समाज में जन्म लेते हैं तो स्वतः ही हमें कुछ अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। समाज हमें संस्कार देता है। जीवन को जीने की शैली सिखाता है। हमें अनुशासन में रहना सिखाता है। हमें नियमों के अनुसार आचरण करने की कला सिखाता है। हमें नैतिकता का पाठ पड़ाता है।कुल मिलाकर समाज हमें असभ्य नागरिक से सभ्य नागरिक बनाता है, वरना हम जब इस दुनिया में आते हैं तो क्या होते हैं। समाज में रहकर ही तो हम मानव से सभ्य मानव बनते हैं। जब समाज हमें इतना कुछ देता है तो क्या हमारा दायित्व नही बनता कि हम समाज को बदले में कुछ दे...