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समाज के प्रति हमारा दायित्व

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           🌟आर सी मेहता🌟 🔸समाज के प्रति हमारा दायित्व🔸 समाज के प्रति हमारा दायित्व बिल्कुल उसी तरह है जैसा कि हमारा अपने परिवार के प्रति दायित्व होता है। हम जिस परिवार में जन्म लेते हैं जिस परिवार में रहते हैं, तो उस परिवार अर्थात उस परिवार सदस्यों के प्रति हमारा कुछ दायित्व बनता है। चाहे वो माता-पिता हो, पत्नी, भाई-बहन या पुत्र-पुत्री आदि हों। समाज भी हमारे परिवार की तरह होता है। ये एक वृहद स्तर का परिवार अर्थात बहुत बड़ा परिवार होता है। जब हम किसी समाज में जन्म लेते हैं तो स्वतः ही हमें कुछ अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। समाज हमें संस्कार देता है। जीवन को जीने की शैली सिखाता है। हमें अनुशासन में रहना सिखाता है। हमें नियमों के अनुसार आचरण करने की कला सिखाता है। हमें नैतिकता का पाठ पड़ाता है।कुल मिलाकर समाज हमें असभ्य नागरिक से सभ्य नागरिक बनाता है, वरना हम जब इस दुनिया में आते हैं तो क्या होते हैं। समाज में रहकर ही तो हम मानव से सभ्य मानव बनते हैं। जब समाज  हमें इतना कुछ देता है तो क्या हमारा दायित्व नही बनता कि हम समाज को बदले में कुछ दे...

चलती का नाम गाड़ी

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आर. सी.मेहता ✨चलती का नाम गाड़ी✨ जिंदगी के रास्ते में बहुत  उतार -चढ़ाव  , मोड़, गड्डे इत्यादि देखने को मिलते है। फ़िर भी हम रुकते नहीं चलते रहते है।आगे बढ़ते रहते है।गिरने के समय संभलने की पूर्ण कोशिश करते है। कभी भूखे  सोते नहीं है फिर भी आगे बढ़ते रहते है ।         इसीलिए तो  जिंदगी को "चलती का नाम गाड़ी " कहते है।उस गाड़ी के हर मोड़ पर बहुत सारे  "लाईफ के टर्निग प्वाइंट"  हमे हर क्षण मिलते हे लेकिन वो चांस हम लेते नहीं है और  छोड़ते हुए आगे बढ़ जाते है।विचार कीजिए ?  अगर हम वो जिंदगी के बदलाव के सकारात्मक चांस जो हमे जिंदगी में हर क्षण मिल रहे है उनको लेकर आगे बढ़े तो जिंदगी जीने के लिए कितनी आसान व सरल बन सकती है क्योंकि हम जिंदगी के कठिन रास्तों को तो पार करने में तो सक्षम है। ✅ 💯बात सरल हे लेकिन गंभीर और विचारणीय है। 🙏 आर सी मेहता ♣️♥️♠️♦️

परिवार,समाज व संगठन का जीवन में बड़ा महत्व है।

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आर सी मेहता मनुष्य के जीवन में परिवार,समाज व संगठन का बड़ा महत्व है। हम सभी के जीवन में परिवार, समाज व संगठन का बड़ा महत्व होता है। अकेला व्यक्ति शक्तिहीन है, जबकि संगठित परिवार,समाज व संगठन होने पर उसमें सभी शक्तियां आ जाती है। इसीलिए कहते है की संगठन की शक्ति से  बड़े-बड़े कार्य भी आसानी से किए जा सकते है।परिवार, समाज व संगठन में ही हम सभी की समस्याओं का समाधान भी है और उस समस्या का हल भी। जो परिवार और समाज व संगठन  संगठित होता है उसमे हमेशा खुशियां और शांति बनी हुई रहती है और ऐसा परिवार व संगठन हमेशा तरक्की के नित नए सोपान तय करता है।  संगठन का प्रत्येक क्षेत्र में विशेष महत्व होता है, जबकि बिखराव किसी भी क्षेत्र में अच्छा नहीं होता है। संगठन का मार्ग ही हम सभी की विजय का मार्ग होता है।सभी अच्छे कार्यों के लिए संगठन वरदान साबित होता है। प्रत्येक धर्म एवं साहित्य संगठन और एकता का संदेश देते हैं। सभी धर्मों में कहा गया है कि परस्पर प्रेमपूर्वक वार्तालाप करना चाहिए।संवाद होना चाहिए। जब संगठन एकमत होकर कार्य करता है तो संपन्नता और प्रगति की ओर अग्रसर होता है। संगठन...

मेहनत से अर्जित धन शुकुन देता है …..

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आर सी मेहता मेहनत से अर्जित धन शुकुन देता है …..   मेरे परम स्वजनों, बात है वर्ष 2008 से पहले की, एक दिन मेरे एक क्लाइंट का ऑफिशल कार्य था मेने उस कार्य के लिए मेने मेरी क्षमता से अधिक राशि मांगी और क्लाइंट ने उसी समय निकाल कर मुझे मांगी हुई फ़ीस प्रदान कर दी। मैने प्रथम प्रॉयोरिटी के साथ शाम तक वो कार्य कर दिया।क्लाइंट बहुत खुश हुवा। लेकिन मुझे पूरी रात भर नींद नही आई और बेचैनी के साथ करवटे  बदलते हुवे सुबह हो गयी।रात भर सोचता रहा कि आज एक छोटे से झूठ से कितना पैसा मिल सकता है।यह कार्य मेने पहले से क्यों नही किया। अगर किया होता तो परिवार को कितना खुश रख सकता था।लेकिन यह सारे क्षणिक विचार मुझे मेरे मन को पहले खुशी देते रहे और बाद में कोसते रहे लेकिन मेरे पर हावी नही हो सके।मेने प्रातः उसका समाधान आखिर निकाल ही लिया और फ्रेश होकर क्लाइंट के घर पहुँचा और पूरी राशि मे से खर्चा 10 प्रतिशत निकाल कर 90 प्रतिशत की राशी पुनः क्लाइंट को लौटाई तो क्लाइंट भोचका हो गया और उसने पूछा कि मेरे से कोई गलती हो गयी हो तो बताये या और पैसा देना हो तो भी बताए। मेने बताया गलती आप से ...

छोड़ो फिक्र, जवां रहे जिंदगी भर…..।

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आर.सी.मेहता छोड़ो फिक्र, जवां रहे जिंदगी भर…..। जवां उम्र से नहीं मन से होते है ... ।                  यह शारीरिक से ज्यादा मानसिक अवस्था हे …।युवा बने रहने के लिए उम्र कोई बंधन नहीं..।    यह तो एक महज एक आंकड़ा है। ये सात बातें आपको हमेशा बनाए रखेंगी  जवान :                                                1.हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहे ।   2.दूसरों से तुलना बंद करें ।                      3.एक दिन "ईडियट डे" मनाए ।        4.मानसिक संरक्षण पर काम करें ।            5.खुद को हमेशा व्यस्त रखें ।                6.असल जिंदगी में कुछ दोस्त बनाएं    7.चुनौतियों को स्वीकार करें  यह 5 आदतें अपनाए,  तन व मन से दूर होगा बुढ़ापा : 1.जल्दी सोए...

दिल से कहो और हौसले की उड़ान भरो।

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                    आर सी मेहता, दोस्तो, मैने अभी तक जो सपने देखे है वो हमेशा सच हुए है,आपको बताना चाहता हूँ कि सपने देखते है तो हकीकत में बदलते है एवं दिल से कही हुई बात  भी उसी तरह हकीकत में बदलती है ।कभी भी दिल से कही हुई बात असत्य नही हो सकती । वो सपनो से कई गुना लक्ष्य को हासिल करती है । हाँ, वो दिल से कही हुई बात आज की मजाक जरूर बन सकती है, उनके लिए जिनके पास न तो दिल है एवं न ही सपने। मैं सोचता हूँ कि  वो कही हुई दिल की बात हो सकती है आपकी कल की उपलब्धि।  यह सत्य घटना है वर्ष 2008 के पहले की ।मेरे एक क्लाइंट उदयपुर कॉटन मिल में ऑफीसर के पद पर कार्यरत थे तथा वो उनकी पत्नी के नाम से यहां पर व्यवसाय कर रहे थे । मैने ही उन्हें सेल्स टैक्स का रजिस्ट्रेशन दिलाया था तथा वो उसमे धागे की बोबीम की ट्रेडिंग का कार्य कर रहै थे।पत्नी का आयकर का रिटर्न् भी मै ही तैयार करता था। कुछ दिनों में उनका ट्रांसफर देहली हो गया एवं परिवार सहित उन्हें वहां पर शिफ्ट हो गए क्योकि वो गाजियाबाद के निवासी थे। वो बहुत ही हंसमुखी स्वभाव...

असफलता कभी निराश नहीं करती.... बल्कि आपको नए आइडिए देती है......

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आर सी मेहता दोस्तो आज से 3 वर्ष पहले की है एवं वास्तविक घटना है।हुवा यू की मेने उस समय एक सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किया उस कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में एक आइटम लगाना था जिसके लिए मेरे उस कार्यक्रम का संचालन कर रहे मेरे हितेषी भाई ने निस्वार्थ भाव से एक व्यक्ति को सजेस्ट किया कि आप उनसे यह आइटम लगवा लीजिए  वो 1000 रुपये में लगा देंगे। मेने कहा मेरे एक मित्र है वो भी यही कार्य करते है तथा उनको सामाजिक कार्य के लिए मुझे  कुछ भी नही देना पड़ेगा एवं 1000 की बचत हो जाएगी।मेने विचार किया कि वो भी अपना आइटम लेकर आएंगे भाड़ा भी लगेगा।तो एक काम करते है कि यह काम उनको ही दे देते है मित्र का क्यो इस सामाजिक कार्य के लिए ओब्लिकेशन लेवे तो मेने उनसे बिना रेट तय किये आइटम लगवाने हेतु बोल दिया।आयोजन शानदार हो गया।आज आइटम लगाया जिनका फोन  पेमेंट हेतु आया कि भाई सा कितना बिल बनाऊ।मेने कहा कि सामाजिक कार्य है एवम जिन्होंने आपका नाम सजेस्ट किया था उन्होंने मुझे बताया था कि 1000 रुपये में आप लगा देंगे।नही भाई सा यह कार्य 5000 का है वो भी उनकी वजह से इतने कम बताये है।इतने तो लगेंगे ही...